हमारी तुम्हारी कहानी है अपनी चलो दोस्ती तो निभानी है अपनी   जलाओ न ख़त जो हमने लिखा था यही प्यार की अब निशानी है अपनी   बढ़ाओ दिलों में न तुम द्वेष इतना अना भी तुम्हें तो जलानी है अपनी   चलो नफरतों को भुलाकर सदा ही मिटा द्वेष,ईर्ष्या भुलानी है अपनी