जहाँ वो गया लौट पाना है मुश्किल रहे याद में क्यूँ भुलाना है मुश्किल   बताए नहीं थे जमाने को अब तक खुला राज अब तो छुपाना है मुश्किल   कहे थे मिटाने वो सारी निशानी लिखे खत जो मुझको जलाना है मुश्किल   बता दो मुझे क्यूँ खफा हो गए हो न इतना खफा हो मनाना है मुश्किल   वफ़ा की जगह तो मिली बेवफाई कि अब संग तेरा निभाना है मुश्किल