डरो मत मौत का मंजर नहीं मैं चुभुं दिल मे कोई नश्तर नहीं मैं   मिले ताले सदा दिल पे तुम्हारे चली आयी हूँ घर बेघर नहीं मैं   हुई हूँ दूर मैं भूलूँ न तुमको हैं बहते अश्क भी पत्थर नहीं मैं   खुदा से माँग अब जो माँगना है न कर उम्मीद यूँ रहबर नहीं मैं   मिले रहजन यहाँ तो राह चलते कभी निकलूँ यहाँ बाहर नहीं मैं