चार दिन की जिंदगी है मुस्कुराने के लिए
साथ आ हँस लें कि रंजो गम भुलाने के लिए
आ गई है क्यूँ खरोंचें आज रिश्तों में यहाँ
भूल जा सारे गिले रिश्ते बचाने के लिए
बेटियां रोती हुई अच्छी नहीं लगती कभी
वो मेरे आँगन में आती खिलखिलाने के लिए
ढूंढ़ती मां की निगाहें क्यूँ भला बेटे को यूँ
लौट आया वो यहाँ है फिर से जाने के लिए
सूझता कुछ भी नहीं है तीरगी हद से बढ़ी
चाँद आया है धरा को जगमगाने के लिए
जानता तू है बनाना खूबसूरत सा मकां
औरतें होती मकां को घर बनाने के लिए