
हया से नजरें झुकी हुई है,जो तेरी उल्फ़त मुझे मिली है
मुराद पूरी हुई है मेरी, खुदा की रहमत मुझे मिली है
सदा मैं खिदमत में दिन गुजारूं लगे कि जैसे सजा है कोई
पली हूँ नाजों पिता के घर में,ये कैसी किस्मत मुझे मिली है
सदा ही देती हूँ मान सबका,नहीं गिला है मुझे किसी से
मिली
Read More! Earn More! Learn More!
