कभी मोहन यहाँ आकर मुझे मुरली सुना जाना
सदा मदहोश रहती हूँ जरा मुझको जगा जाना
सदा ही ढूंढ़ती है अब नजर मेरी तुम्हें कान्हा
तुम्हें तो मैं बुलाती हूँ दरस अपना दिखा जाना
जहर भी पी गई मीरा तुम्हारे प्रेम में कान्हा
मुझे भी प्रेम में अपने यहाँ मीरा बना जाना
रहे बेचैन आँखें अब तेरे दीदार को कान्हा
सलोना रूप आँखों में मेरे कान्हा बसा जाना
भुवन मोहन यहाँ आओ जगत है प्यार का भूखा
सभी को प्रेम का प्याला यहाँ भर भर पिला जाना