घर आए मेहमान गए हैं क्यूँ लगता भगवान गए हैं हम फेकें वो भूखे मरते धरती से इंसान गए हैं   मौत को चुन क्यूँ लेते हैं वो क्यूँ सब छोड़ किसान गए हैं   धोखा खाएँगे कैसे अब हम तुमको पहचान गए हैं   इश्क इश्क में पड़ना मत अब इतना तो हम जान गए हैं