मैं नारी हूँ
धरित्री को जीवंत रखने में
मेरा ही योगदान है।
मैं स्वतंत्र हूँ,पर मुझे अपनी
मर्यादा का पूरा भान है।
मेरे कार्यक्षेत्र विस्तृत हैं
पर मैं अहंकारी नहीं हूँ।
तुम्हारे बनाए 'मकान' को
मैं ही 'घर' बनाती हूँ।
मैं शिक्षा पाती हूँ,ताकि
संतान के रूप में
तुम्हें शिक्षा दे सकूँ।
मैं गाती हूँ,ताकि
तुम्हारे हृदय में
संवेदना के श्रोत बहा सकूँ।
मैं हँसमुख और सहनशील हूँ,ताकि
तुम्हारे अहंकार के दर्प को
चूर कर सकूँ।
मैं क्रोधी हूँ,ताकि
क्रोध की ज्वाला में
तुम्हारी कुत्सा को जला सकूँ।
मैं सर्जनहार हूँ,ताकि
तुम्हारे अस्तित्व को बचाए रख सकूँ।
मुझे ठीक से पहचान लो
मैं नारी हूँ।