कहानी प्यार की कोई हो वो बेकार होती है
मुहब्बत करने वालों की सदा क्यूँ हार होती है
रहे मुश्ताक़ मेरा दिल सदा दीदार को तेरे
कि तेरे बिन मेरी ये जिंदगी बेज़ार होती है
तुझे तो मान देती हूँ सदा खुद से भी ज्यादा मैं
मुझे हर वक्त क्यूँ तुझसे यहाँ तकरार होती
सदा देंगे दुआएँ वो जो भूखे पेट हैं सोते
खिला दें पेट भर खाना तसल्ली यार होती है
तुझे क्यूँ चाह रहती है सदा बेटे ही पैदा हों
नहीं अब बेटियां सर पे किसी के भार होती है