हुआ नभ अकेला कि कुछ खो गया

छुपा चाँद फिर से कहाँ ये गया

 

अमावस भरी कालिमा है यहाँ

तमस से घिरा पंथ फैला यहाँ

 

चलें हम दिया इक जलाएँ कहीं

धरा से तिमिर को भगाएँ सही

 

रहे क्यूँ तिमिर झोपड़ी में भला

करें अब उजाला दिया को जला

 

अँधेरा न मन का दिया से मिटे

जला प्यार उर में तिमिर तब हटे

 

जला प्यार का दीप नफरत भुला

दिखा प्यार का द्वार जो अब खुला

 

~नीलू चौधरी