आज फिर से चाँद ये आधा हुआ आसमां का दर्द कुछ ज्यादा हुआ   बढ़ गई है भीड़ इतनी हर जगह आदमी फिर क्यूँ यहाँ तन्हा हुआ   कर भरोसा मत,यहाँ सब झूठ है बारहा मुझको यहाँ धोखा हुआ   मैं मना करती थी देखो ख्वाब मत ख्वाब कोई भी नहीं पूरा हुआ   मिट गई है अब मेरी तनहाइयाँ मिल गया है दोस्त जो खोया हुआ