दर्द मेरा देखकर मुझसे किनारा कर लिया छोड़ कर कोठी सदा दुख में गुजारा कर लिया दोष तुझ पर क्यूँ मढूं मैं दोष तेरा था कहाँ प्यार में धोखा मिला फिर क्यूँ दुबारा कर लिया आज तक समझी नहीं ये राज तेरा मैं कभी दूर से ही देखकर तूने इशारा कर लिया थी बहुत खुश देख ये गुलजार था तेरा चमन खाक में सब मिल गया कैसा नजारा कर लिया चोट खाए हैं बहुत ही दिल यहाँ पर ऐ सनम अब समझ आया भरोसा क्यूँ तुम्हारा कर लिया