मंदिर मस्जिद में ढूंढो मत,मिलता है भगवान कहाँ?

रहता है वो ख़ुद के भीतर,फिरता है नादान कहाँ?


कर्मठ जीवन ज़ीना सबको कृष्ण सदा सिखलाते हैं,

कर्म किए बिन जो फल चाहें है ऐसा वरदान कहाँ?


चूस ग़रीबों के खूँ को वो शान दिखाते महलों में,

ऐसे बेईमानों को अब मिलता है सम्मान कहाँ?


तिकड़मबाजी से मुलज़िम भी बैठे होते संसद में,

बोले संसद की कुर्सी भी सच्चा है मतदान कहाँ?


कैसे झूठे वादे करके सत्ता में वो आते हैं,

बेच वतन को खाने वाले मीरों का ईमान कहाँ?


छीन ग़रीबों की रोटी वो सोते सुख की नींद सदा,

ऐसे ही ज़ालिम जीते हैं दिखते हैं रहमान कहाँ?


#नीलू_चौधरी