माँ का दिल सागर लगता है
प्यार भरा गागर लगता है
सब पर प्यार लुटाने वाली
तुझ बिन सूना घर लगता है
चहके बेटी घर आँगन में
घर कितना सुंदर लगता है
राह चले रहजन मिल जाए
निकलें कैसे डर लगता है
जब अम्बर पर छाता बादल
तब बेबस दिनकर लगता है
बादल बरसे नभ से इतना
स्वेत धवल अम्बर लगता है
छोड़ गए हो जब से तुम यूँ
जीना भी दुष्कर लगता है