हर पल,हर क्षण
मैं तुम्हें महसूस करती हूँ।
तुम मेरे आस पास हो
तुम मेरे ख्वाबों में हो,
साँसों की गरमाहट में हो तुम
मेरी रूह में उतर गए हो तुम।
तुमसे अलग मेरा कोई वजूद ही नहीं
आखिर मुझ पर कब इतने हाबी
हो गए तुम?
कुछ पल तुमसे दूर होकर
नीरवता की चादर ओढ़
सोना चाहती हूँ।
पर हो नहीं पाता
क्योंकि
मेरे धड़कन की आवाज में भी
तुम्हारे गान के स्वर ही घुले हैं।