दूर घर से हूँ मगर क्यूँ याद माँ आती भी है रोज माँ सपनों में आकर खूब सहलाती भी है   फैसला तो कर लिया घर छोड़कर जाने का वो अश्क आँखों मे दिखा, लगता कि जज्बाती भी है   है बुरी दुनिया जहाँ पर जुल्म सहती औरतें जिंदगी दोजख हुई,फिर क्यूँ वो मुस्काती भी है   बेटियों को बोझ सर का यूँ न समझो,बाप हो दिल लगा पढ़ती है वो,पैसे कमा लाती भी है   चाहिए ऐसी नहीं सरकार तानाशाह ये हिटलरी आदेश देती और धमकाती भी है