
स्त्री प्रतिदिन अपने चौका में
करती है यज्ञ,
देती है श्रम की आहुति।
स्विष्टकृत होम में अपना स्नेह
कर देती है समर्पित।
देती है वसोर्धारा
अपने पसीने से।
चौका ही होता है
एक स्त्री का तीर्थ।
कूकर की सीटी और
पकने की आवाज से
होता है वैदिक मंत्रोच्चार का आभास।
स्त्री
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