स्त्री प्रतिदिन अपने चौका में

करती है यज्ञ,

देती है श्रम की आहुति।

स्विष्टकृत होम में अपना स्नेह

कर देती है समर्पित।

देती है वसोर्धारा

अपने पसीने से।


चौका ही होता है

एक स्त्री का तीर्थ।

कूकर की सीटी और

पकने की आवाज से

होता है वैदिक मंत्रोच्चार का आभास।

स्त्री प्रतिदिन

दिव्य ब्रह्मभोज देने का 

पाती है पुण्यफल।


इदं न मम का मंत्र 

 आत्मसात कर लेती है स्त्री,

अपना सर्वस्व कर देती है होम।

खुद बन जाती है समिधा,

मिलती है यज्ञ के भस्मावशेष में।


#नीलू_चौधरी