युवा विनम्र हो सदा

रहो सदा न रोष में

अनिष्ट को न सोच तू

कि सोच ईष्ट ही सदा


प्रहार ही प्रहार हों

रुकावटें हजार हों

डरो न शूर वीर तू

प्रचंड तेज पुंज तू


वरेण्य को सहेज लो

प्रदीप्त दिव्य भाल हो

सगर्व शीश को उठा

चलो युवा बढ़ो युवा


सुकर्म में बनो प्रवीण

गढ़ो कि राह तू नवीन

अभीष्ट सिद्धि प्राप्त हो

समस्त कष्ट नाश हो


अमर्त्य पुत्र ईश के

विवेकशील पूत हो

स्वयं को सँवार लो

सँवार दो जहान को।


#नीलू_चौधरी