तुम हमेशा लीक से हटकर ही
चलती हो
बिना ये सोचे कि लोग
क्या कहते हैं तुम्हारे बारे में,
न जाने कितनी उँगलियाँ
उठती हैं तुम्हारी ओर,
अनगिनत आँखें घूरती
नजर आती हैं तुम्हें।
कुछ मर्यादाएँ निहित हैं
औरत जात के लिए....
ठहाके मारकर हँसना
एक अच्छी औरत की पहचान नहीं होती
पर तुम्हारे
ठहाकों की गूँज तो
पड़ोस के घर तक जाती है।
इजाजत नहीं है औरत जात को
मर्दों वाली चाल चलने की,
पर तुम्हें तो हमेशा
सीना तानकर,मुट्ठी भींचकर
चलने की आदत है।
भले घर की औरतें नाचती नहीं हैं
पर तुम तो
हर खुशी के मौके पर
झूमकर नाच उठती हो।
ऊँची आवाज में बातें करना
खानदानी औरतों को शोभा नहीं देती
पर जोर-जोर से गप्पें मारना
तुम्हारी आदत में है शुमार।
दिन ढलने से पहले
भली औरतें
आ जाती हैं अपने घर
पर तुम तो
रात-बेरात बेखटके निकल पड़ती हो
घर से।
औरत जात घर की शोभा होती है
पर तुम तो
धरा का ओर-छोर नापने को
रहती हो बेताब
हर चुनौती करती हो स्वीकार
मर्दों के कंधे से कंधा मिलाकर
होने लगी हो खड़ी
तभी तो
खटकने लगी हो
मर्द जात की आँखों में।
#नीलू_चौधरी


