उदासी है, दवा है और मैं हूँ,

सदा माँ की दुआ है और मैं हूँ।


हुए बच्चे हैं घर से दूर जबसे,

कि घर सूना पड़ा है और मैं हूँ।


फ़लक पर चाँद सूरज है अकेला,

अकेला तू सदा है और मैं हूँ।


नहीं अब रौशनी आती कहीं से,

अँधेरा है, दिया है और मैं हूँ ।


भरोसा उठ गया तेरी वफ़ा से,

बची अब वेदना है और मैं हूँ।


~नीलू चौधरी