परिंदे उड़ चले घर से ,गुमाँ में आसमाँ देखो,

सफ़र बाकी अभी है ,और होगी इम्तिहाँ देखो।


न बैठो ख़्वाहिशों को मारकर तुम इस तरह तन्हा

बढा है मंज़िलों की खोज में ये कारवाँ देखो।


न अपनापन दिलों में है, रहें बस साथ घर में सब,

कहें कैसे इसे अब घर कि है केवल मकाँ देखो।


है उजड़ा आशियाँ उनका, सजाया था मुहब्बत से

हमेशा उन निगाहों में जरा ग़म के निशाँ देखो। 


न फैला नफ़रतों की आग झुलसा है तेरा अपना,

जहाँ दोज़ख़ हुई है ज़िन्दगी अब वो जहाँ देखो।


#नीलू_चौधरी