
ओ धर्म के ठेकेदारों!
संस्कृति के रक्षकों!
बचपन से ही किताबों में
पढ़ती आयी हूँ -
विविधता में एकता ही पहचान है
हमारी संस्कृति की।
मैं तो हर साल गौरी को
रोजी के घर
ईद की सेवइयां
खाते देखती हूँ,
तो होली के रंगों में सर
Read More! Earn More! Learn More!
