बे ख्याली में कर देती हूँ
हमेशा ही कुछ ऐसी गलती कि
घर के लोगों की प्रश्नवाचक दृष्टि से
बिंध जाती हूँ।
कुकर में चावल और पानी डाल
उसे चूल्हे पर चढ़ा
मैं लग जाती हूँ
अन्य कामों को निपटाने में
जब लगती है नथुने में गैस की महक
भागती हुई आती हूँ रसोई में,
बिना लाइटर जलाए ही
चूल्हे का स्विच था ऑन,
उस वक्त मैं
झुंझला जाती हूँ अपनी बे ख्याली पर।
पाँच दिनों की दवा खाने के बाद,
घंटे भर ट्रैफिक जाम से निजात पाकर
जब दुबारा पहुँचती हूँ
डॉक्टर के क्लीनिक पर...
बटुए में हाथ डाल खोजने पर पता चलता है
डॉक्टर की परची भूल गई लाना।
मैं रो पड़ती हूँ अपनी बेख्याली पर।
बाजार के लिए निकलते वक्त
बेटी अपनी फरमाइशों की लिस्ट
थमा जाती है यह कहते हुए कि
मां भूलना मत,जरूर लाना।
लौटकर आते ही
बेटी रुआँसी होकर जब कहती है
माँ तुम इतनी भुलक्कड़ क्यों हो?
मैं अफसोस करती हूँ अपनी बे ख्याली पर।
पति के चाय और बेटे के पानी माँगने पर
मैं पकड़ा देती हूँ
बेटे के हाथ में चाय और
पति के हाथ मे पानी का ग्लास।
दोनों जब भौंचक देखते हैं मुझे,
मैं हँस पड़ती हूँ अपनी
बेख्याली पर ये सोचते हुए
कि मैं ऐसी ही हूँ।
#नीलू_चौधरी


