इश्क़ की बाज़ी जब खेल के हारे होंगे
जब डूबे होंगे ग़म में दर्द किनारे होंगे
खालीपन दिल में हद से गुज़र गया होगा
कुछ शायर तन्हाई ने यूँ भी मारे