तेरा प्यार...
रगों में दौड़ता तो है, मगर लब तक नही आता,
बताना भी नही आता, जताना भी नही आता.
तेरी ये बेहिसी, मेरे दिल को चीर देती है,
मेरे इस दर्द-ए-उलफत को, दबाना भी नही आता,
छुपाना भी नही आता.
तू सोचति तो होगी, ये कैसा मजनू है?
लुभाना भी नही आता, रिझाना भी नही आता.
ना तजुरबा कार आशिक पे ऐतबार है मुश्किल,
इसे रस्में मुहब्बत को निभाना ही नही आता.
-आफरीन शेख़ /@AfrinNazms
