जलाए बैठी हुँ चिराग़ तेरे आने के इंतज़ार में,
आज फिर ख़त्म ना हो रात तेरे आने के इंतज़ार में.
तू पेहले मुल्क का है,बाद में है मेरा.
दिन रात दे रहा है, सरहदों पे पेहरा.
हर वक़्त है ये देहशत, न धरले तुझको दुश्मन,
न कर ले तुझको क़ैदी, न टूटे अपना बंधन.
दुआ है रब से मेरी, मैं रहू तेरी सुहागन.
मैं नई नवेली दुल्हन.
-आफरीन शेख़ /@AfrinNazms


