झपकी पलकें, जो ख़्वाब काँच के थे चूर हुए.कभी मेहबूब थे मेरे, आज मगरूर हुए.कि कोशिशें बोहोत, हम फिर भी नाकाम रहे.छुड़ा गए दामन, वो जब मशहूर हुए.
झपकी पलकें, जो ख़्वाब काँच के थे चूर हुए.कभी मेहबूब थे मेरे, आज मगरूर हुए.
कि कोशिशें बोहोत, हम फिर भी नाकाम रहे.छुड़ा गए दामन, वो जब मशहूर हुए.