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ख़्वाब


झपकी पलकें, जो ख़्वाब काँच के थे चूर हुए.कभी मेहबूब थे मेरे, आज मगरूर हुए.

कि कोशिशें बोहोत, हम फिर भी नाकाम रहे.छुड़ा गए दामन, वो जब मशहूर हुए.

— आफरीन शेख़/@AfrinNazms
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