अपने अन्दर कहानियाँ समाए बैठा हुँ.

टूटे दिलो की, आह दबाए बैठा हुँ.

हर आशिक के निगाहों में बसा रहता हुँ,

मैं हर मेहबुबा के घर का झरोखा हुँ.

है देखे मैंने, बहुत चिलमन उठते हुए़,

इंतज़ार में आशिक खड़े पिटते हुए.

देखी मासूमियत, मोहब्बत, इश्क़ और दगा,

प्यार करनेवालों को क्यूँ मिलती है सज़ा.

देखे बिछड़े साथी और टूटती चूड़ी,

क़ैद मेहबूब के पैरों में, लिपटी बेड़ी.

सुना कहते किसी को, तेरी रहूँगी मैं सदा,

रोते रोते अपने आशिक को जब कहा अलविदा.

- आफरीन शेख़ / @AfrinNazms