इस कदर ख़्वाबिदा है ज़िन्दगी उनकी,

अगर ख़्वाब टूटा तो बिखर जाएँगे.

ना वक़फी, तकबबुर से पैमाना है लबरेज़,

जो पैमाना छलका तो किधर जाएँगे.

दौलत शोहरत कि ख़ुमारी में गुम है, ना अपनो कि परवाह, ना मुफ़लिसों पे करम है.

अपने करमों कि इबरत ना सेह पाएँगे,

अगर ख़्वाब टूटा तो बिखर जाएँगे.

-आफरीन शेख़ /@AfrinNazms