मेरे गाँव के मकान के सामने एक पेड़ है गुमनाम...
रात बिताने आते है कई पंछी उस पर यहाँ सुबह उड़ जाते है चकते हुए लेकर अपने काम।। छोटी छोटी चीटियों को अपने कंधे पर बैठाकर दिखाता है दुनिया मे होते हुए काम
उसने अपने दो छोटे पौधे लगाकर... बना लिया है अपना परिवार अब मेरे गाँव के मकान के सामने उस पेड़ का परिवार है गुमनाम।।


