कल रात बहुत कुछ पाया मैने मेरे अंदर
मैं रात भर जागा वो चैन से सोया मेरे अंदर
ज़हन में कई सवाल थे आँखों में नमी भी थी
लव मुस्कुराये और वो टूट कर रोया मेरे अंदर
मैं उलझा रहा इस दुनिया मे भले ही
वो ख़ामोश एक लम्हा बनकर रहा मेरे अंदर
और जितना देखता था अक़्स आईने में मैं
वो उतना ही दिल को सुकूँ देता रहा मेरे अंदर