मैं कितनी बार दुश्मनों से भिड़ा हूँ पर ज़ख़्म मुझे अपनो के अल्फाज़ो ने दिया है   मेरा दिल कभी मोम का हुआँ करता था पत्थर मुझे ज़माने की ठोकरों ने किया है   कभी था जोश खून में देश के लिए करने का चुप्पी ने रखवालो की मेरा खून पानी किया है