बाढ़ ने सभी के घर को तह तक डुबाया है
ये नदी को इतना करीब किसने बुलाया है
उस चेहरे ने रूह तक को छीन लिया मुझसे
ख़ाब की पारी को हक़ीक़त में किसने बुलाया है
बेरंग दुनिया से बाक़िफ़ था अच्छा मैं तो
ये प्यार के रंगों से दुनिया को किसने सजाया है
हमने तो चलना ही दस्तूर समझा था जीवन का
ये मंज़िलो को इतना करीब किसने बुलाया है