ख़ुद की तलाश में निकला हूँ बड़ी देर से ख़ुद से ख़ुद का पता पूछ रहा हूँ बड़ी देर से अजीब तमाशा फैलाया है बाज़ार में मैंने इस ज़माने को लुत्फ़ दे रहा हूँ बड़ी देर से मेरे अंदर बाकी है तू कही साँसों की तरह मैं इस वहम को हवा दे रहा हूँ बड़ी देर से बहुत खमोशी है अंदर बाहर हमारे दरमियां क्यों गुफ्तगू नही कर पा रहा हूँ बड़ी देर से वो मेरे सीने पर सर रखकर सोता है सुकूँ से मैं अलाव सी गर्मी दे रहा हूँ बड़ी देर से रोशनी सी फैली है चारो तरफ़ मेरे आने से मैं ख़ामोश मसाल सा जल रहा हूँ बड़ी देर से ये कैसा ज़ख़्म दिया तूने मुझे ए बेबफाई का मैं दिल को दर्द की दवा दे रहा हूँ बड़ी देर से