
जो अधूरी थी मंज़िले उन्हें पाने चला हूँ
मैं कई ख़ाब लिये पूराने चला हूँ
कोई मेरे सफ़र का रास्ता न बतलाए मुझे
मैं ख़ुद को फिर से आज़माने चला हूँ
लड़ रहा हूँ इन तेज़ हवाओ से कबसे
मैं रोशन आखरी चराग़ लिए चला हूँ
एक कतरे के लिए तरसा था कभी जहाँ
Read More! Earn More! Learn More!
