दिन अब सुकूँ से गुज़रने लगे है
ख़ाब मेरी आँखों पर ठहरने लगे है
हर तरफ़ है ख़ुशी सी शहर में मेरे
देखो ज़मी और आसमाँ भी मिलने लगे है
नदियाँ कल-कल बहती है पेड़ घने है यहाँ
वो सारे पंछी अब वापस घरों पर रुकने लगे है
बच्चे स्कूल के बोझ से नही ख़ुश होकर जाते है
कुछ लोग शाम को वापस पार्क में घूमने लगे है
अब यहाँ लोग दौड़ते तो है पर मुस्कुराते भी है
लोग मेरे शहर में जीने की ख्याइस करने लगे है