छूना चाहता हूँ आसमाँ को बड़ी देर से ज़मी पकड़े है मेरे पैरों को बड़ी देर से गली के आखरी कोने तक सन्नटा है बस ढूँढ रहा हूँ आवाद शहर को बड़ी देर से इमारते है चारो तरफ़ और दौड़ते है लोग बस खोज रहा हूँ हँसी और रोशनी को बड़ी देर से जिक्र होता था नदी,पेड़ और पहाड़ो का कभी खोज रहा हूँ ताज़ी हवा को बड़ी देर से