इल्ज़ाम फक़त ख्यालात पे क्यों आता है??



हसरत ए दीद ओ वस्ल लिए ख्याल मेरा


तेरे हुस्न ए ख्वाबीदा से जब टकराता है,



ख्वाहिश ए जानाँ से दीवाने की रूह को


पयाम ए इश्क़ ए जावेदाँ मिल ही जाता है,



अक्स ए ख़ुशबू बनकर वो इत्र ओ अम्बर


की तरह दिल ओ दिमाग पे छा जाता है,



लाख कर ले कोशिशे होश में रहने की


पर रूह में समा कर बहका ही जाता है,



क़सूर तो शबाब ए इश्क़ ए जावेदाँ का है


तो इल्ज़ाम फक़त ख्यालात पे क्यों आता है??



~@qamarkidwai ✍️