इस घूंघट से ये चंद्रमा कब तक छुपाओगी,पूर्णिमा की रात को तो दिख ही जाओगी,प्राथना करूं यही की मेरा भाग्य बन कर आओगी,वचन दो की यूं ही जीवन भर तुम मुझे चाहोगी.......
इस घूंघट से ये चंद्रमा कब तक छुपाओगी,पूर्णिमा की रात को तो दिख ही जाओगी,
प्राथना करूं यही की मेरा भाग्य बन कर आओगी,वचन दो की यूं ही जीवन भर तुम मुझे चाहोगी.......