प्रेरणा गीत

      (स्वरचित कविता)

 

ख्वाबों की बिन्दी, उमंगों का गजरा,

सपनों की काजल, सजाए चली मैं ।

हों राहें कठिन, लक्ष्य दुर्गम भी तो क्या,

चुनौती की लाली, लगाए चली मैं ।।

हँसे लोग बेशक, कहे चाहे कुछ भी,

बढ़ती चली मैं, लिए लक्ष्य मन में ।

हूँ गुड़िया तुम्हारी, मेरे मम्मी-डैडी,

ना हारी, ना हारूँगी, जीवन सफर में ।।

 

गरीबी ने जीना मुझे है सिखाया,

मजबूरी, ईरादों को पुख्ता किया है।

ना भटकूँ कभी भी, हो मायुस पथ से,

जरूरत ने मेहनत को अपना लिया है ।।

बदनशीबी की बारिश में भींगी हूँ फिर भी,

चलती चली मैं, मगन अपनी धुन में ।

हूँ गुड़िया तुम्हारी, मेरे मम्मी-डैडी,

ना हारी, ना हारूँगी, जीवन सफर में ।।

 

घिरी मैली नजरों की काली घटा हो,

या आँधी जमाने की दकियानुसी की ।

अवरोधक बनें बेशक संकीर्ण विचारें,

ना परवाह है लोगों के कानाफुसी की ।।

छटेंगें कभी तो कुरीति के बादल,

बढ़ती चली मैं लिए आस मन में ।

हूँ गुड़िया तुम्हारी, मेरे मम्मी-डैडी,

ना हारी, ना हारूँगी, जीवन सफर में ।।

 

चकाचौंध दुनिया की मोहक अदाएँ,

कर सकें मुझको विचलित, ये संभव कहाँ है ?

हों बाँहें फैलाए बुराई की लपटें,

मैं मंजिल से भटकूँ, ये मुमकिन कहाँ है ?

एक आशा का दीपक जलाए निरन्तर,

गुनगुनाती चली मैं, नवीन गीत मन में ।

हूँ गुड़िया तुम्हारी, मेरे मम्मी-डैडी,

ना हारी, ना हारूँगी, जीवन सफर में ।।

         --------नवीन कुमार