कोरोना कालकूट विष बन के बरस पड़ा


समस्त संसार इसके आगे विवश खड़ा,



खेल मौत का यह खेलता फिर रहा इधर-उधर


मृत्यु तांडव हो रहा नज़र ले जाओ तुम जिधर,



अच्छे-अच्छों को इसने किया बिलकुल ही पस्त,


कभी न होने वालों का भी होने लगा सूर्य अस्त,



गली, गगन, सदन, भवन को सुनसान कर दिया,


मौत के आतंक से घरों को इसने भर दिया 



दो लाख जीवन को यह अजगर पल में निगल गया


यह सोचना गलत है कि हृदय इसका पिघल गया,



बच्चों से स्कूल छीना इसने मजदूरों से मजदूरी,


लोगों को जो पाठ पढ़ाया वो है - "रखो उचित दूरी"



इंसान का दुश्मन इसने खुद इंसान को ही बनाया है,


मेरा प्रयास पसंद आएगा यह सोच के छंद सुनाया है ।।




~ नवीन 'अनजान '