रात लम्हे मदहोश है बैठे 

तेरी चाहत में अनजान है

बेमतलब साजिशों के बीच 

यह सांस लेते इल्जाम है 

किसी और का शरीर है बिकता 

कोई और यहां पर खाता है 

नाजुक चाहतों के बीच चुपके से 

आसमान भी सो जाता है 

अब पहुंचा हूं तेरे दिल में तुझे कायल ही नहीं 

हर दिन कितनी सौगात से मरता उसे यह खयाल ही नहीं