
गीत- #मक़सद_इन_हवाओं_का
मक़सद इन हवाओं का,जाना - पहचाना हैं,
जैसे ये हवाएं,पीर तेरी गाती हों।
ये टपकती हुई बूंदे और ये नग्न आस्मां,
तेरे नैनों के मोती ,रूह पे टपकाती हों।
ये हिलोरे खाते वृक्ष , और उनकी हिलती झाड़ियां,
मानो मुझको ये सब कुछ ,तेरी राह दिखाती हो।
रुत ये जो अाई हैं , और भी लगती अच्
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