Poetry 1 min read 15.9K reads

उम्मीद आदमी से


उम्मीद रखकर आदमी सेशिकायत की भगवान से!

चूक बस एक यही हो गईज़माने में नादां इन्सान से!

— डॉ. एन. आर. कस्वाँ
Read more Earn more Learn more