आपका किरदार आप से अच्छा आप से बेहतर कोई नहीं निभा सकता,
अपना तक़ाबुल किसीसे न करें आपकी बराबरी में कोई नहीं आ सकता!
किसीको नीचा दिखाकर कोई शख़्स कभी कहीं ऊंचा नहीं उठा आजतक,
बेहतर सोचे बग़ैर बेहतर कर्म किए बग़ैर कोई कभी बेहतर नहीं पा सकता!
डॉ. एन. आर. कस्वाँ

