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सच्चा मन


कितना कच्चा कितना सच्चा है मननादां बच्चा बन कर कितना रोता है!चुप कराने जब कोई नहीं आता तोमां तो रही नहीं खुद ही चुप होता है!© डॉ. एन. आर. कस्वाँ

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