मयस्सर नहीं है बशर यहाँ लुत्फ़-ए-सुख़न हर किसीको's image
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मयस्सर नहीं है बशर यहाँ लुत्फ़-ए-सुख़न हर किसीको

हासिल होता नहीं है अहसास-ए-दर्द-ए-मन हर किसीको

मयस्सर नहीं है बशर यहाँ लुत्फ़ -ए -सुख़न हर किसीको

बेशक लाख परवाज़ भरेहै परिंदा आस्मां की

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