इस दरख़्त पर बचेंगे ना उस शजर पर बच पाएंगे
गर जंगल में आग लगेगी तो आशियां हरजगह जल जाएंगे!

कुछ हवा का बिगड़ेगा ना आग का बिगड़ पाएगा
बे-गुनाह बेकसूर मासूम परिंदे बे-सबब बेवज़ह जल जाएंगे!

©डॉ. एन. आर. कस्वाँ 'बशर' bashar بشر