बड़ा मुश्क़िल काम है कि सबकुछ सबके मन के माफिक हो जाए
जीने का मजा आ जाए अगर ये ज़िंन्दगी हमारे मुताबिक़ हो जाए !
कोई करिश्मा होकि हम दोनों में कोई तो सुलहमुहासिबा हो जाए
जिंदगी हमारे माफिक होजाए या हम जिंदगी के माफिक हो जाएं !
✍???? डॉ. एन. आर. कस्वाँ
गुलिस्तान-ए-अदब gulistaan-e-adab گلستانِ ادب

