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मैयत को तेरी अपनों ने तिरे मज़ार में उतार दी

ख़ुसूसियत रुह की हमेशा ही दरकिनार की
लिबास था ज़िस्म येह संवारने में उम्र गुजार दी

हवा हो गई हवा बेकार गई त

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